SATURDAY 05 APRIL 2025
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पाकिस्तान का सबसे महंगा, लेकिन वीरान एयरपोर्ट आखिर क्यों बना रहस्य?

पाकिस्तान ने बड़े दावों के साथ ग्वादर इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन किया था, जिसे CPEC के तहत चीन के सहयोग से 24 करोड़ डॉलर की लागत से बनाया गया। लेकिन महीनों बाद भी यह एयरपोर्ट वीरान पड़ा है। यहां न तो कोई विमान उतर रहा है, न ही कोई यात्री नजर आता है। स्थानीय लोगों को इससे कोई फायदा नहीं हुआ, बल्कि उन्हें रोजगार से भी वंचित रखा गया है। बलूच अलगाववाद और पाकिस्तानी सरकार की नाकामी ने इस प्रोजेक्ट को एक और फेलियर बना दिया है।

पाकिस्तान का सबसे महंगा, लेकिन वीरान एयरपोर्ट आखिर क्यों बना रहस्य?
पाकिस्तान ने बड़े दावों और उम्मीदों के साथ अपने सबसे नए और सबसे महंगे हवाई अड्डे, ग्वादर इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन किया था। अक्टूबर 2024 में बने इस एयरपोर्ट को लेकर सरकार ने बड़े-बड़े वादे किए थे। कहा गया था कि यह ग्वादर और बलूचिस्तान के आर्थिक विकास की धुरी बनेगा, जिससे यहां के लोगों को रोजगार मिलेगा और यह क्षेत्र पाकिस्तान के लिए व्यापार का बड़ा केंद्र बन जाएगा। लेकिन कुछ महीनों बाद ही यह एयरपोर्ट एक रहस्य और मज़ाक बनकर रह गया है।
आज इस एयरपोर्ट पर न तो कोई विमान उतर रहा है, न कोई यात्री दिखाई देता है, और न ही यहां वो सुविधाएं काम कर रही हैं, जिनके बड़े-बड़े वादे किए गए थे। पाकिस्तान के लिए यह एक गर्व की परियोजना थी, लेकिन अब यह सवालों के घेरे में है। आखिर क्यों यह एयरपोर्ट बनकर भी अधूरा है? आखिर क्यों इस एयरपोर्ट को लेकर पाकिस्तान सरकार कुछ साफ नहीं बता रही? और क्या यह सिर्फ चीन के लिए बना है?

24 करोड़ डॉलर का महंगा सपना

ग्वादर इंटरनेशनल एयरपोर्ट को बनाने में 24 करोड़ अमेरिकी डॉलर (लगभग 2000 करोड़ पाकिस्तानी रुपये) खर्च किए गए। यह पाकिस्तान का सबसे महंगा और आधुनिक हवाई अड्डा कहा गया, जिसे चीन ने चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) के तहत फंड किया था। इस एयरपोर्ट को बनाने का मकसद यह बताया गया था कि यह ग्वादर को दुनिया से जोड़ेगा और इसे एक बड़े व्यापारिक केंद्र के रूप में विकसित करेगा।
लेकिन अब जब एयरपोर्ट बन चुका है, तो यहां न तो कोई विमान है और न ही कोई एयरलाइन इसे इस्तेमाल कर रही है। पाकिस्तान ने बड़े धूमधाम से इसका उद्घाटन किया था, लेकिन वह भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए किया गया। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और चीनी प्रधानमंत्री ली कियांग ने इसका उद्घाटन किया था, लेकिन तब भी इस एयरपोर्ट पर एक भी विमान नहीं था।

ग्वादर एयरपोर्ट सिर्फ चीन के लिए बना है?

पाकिस्तान और चीन के रिश्तों को समझने वाले जानकारों का कहना है कि ग्वादर एयरपोर्ट का असली मकसद पाकिस्तान के लोगों के लिए नहीं, बल्कि चीन के लिए है। चीन पिछले एक दशक से CPEC के तहत पाकिस्तान में अरबों डॉलर का निवेश कर रहा है, खासकर बलूचिस्तान और ग्वादर में। ग्वादर का महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि यह चीन के शिनजियांग प्रांत को सीधे अरब सागर से जोड़ता है। इससे चीन को अपना सामान समुद्र के जरिए अफ्रीका, मिडल ईस्ट और यूरोप तक पहुंचाने में आसानी होगी। इसलिए यह एयरपोर्ट चीन के निवेशकों, इंजीनियरों और अधिकारियों को सुरक्षित पहुंचाने के लिए बनाया गया है। पाकिस्तान-चीन संबंधों के जानकार अजीम खालिद कहते हैं, "यह एयरपोर्ट पाकिस्तान या ग्वादर के लोगों के लिए नहीं है। यह चीन के लिए है, ताकि वह अपने लोगों को ग्वादर और बलूचिस्तान तक सुरक्षित ला और ले जा सके।"
ग्वादर शहर की कुल आबादी 90 हजार के आसपास है, लेकिन यह एयरपोर्ट हर साल 4 लाख यात्रियों को संभालने की क्षमता रखता है। सवाल यह उठता है कि जब ग्वादर में इतनी बड़ी आबादी ही नहीं है, तो इस एयरपोर्ट का असली मकसद क्या था? ग्वादर के लोगों का कहना हैं कि"उन्हें लगा था कि उन्हें CPEC से रोजगार मिलेगा, जीवन में एक मकसद मिलेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।" CPEC के चलते बलूचिस्तान में उग्रवाद और बढ़ गया है। बलूच अलगाववादी इस प्रोजेक्ट को अपने संसाधनों की लूट के रूप में देखते हैं। उन्होंने कई बार पाकिस्तानी सैनिकों और चीनी इंजीनियरों पर हमले किए हैं। ग्वादर के बलूचिस्तान अवामी पार्टी के जिला अध्यक्ष अब्दुल गफूर होथ ने दावा किया कि "ग्वादर एयरपोर्ट में एक भी स्थानीय व्यक्ति को नौकरी नहीं मिली। यहां तक कि चौकीदार की नौकरी भी किसी बलूच को नहीं दी गई।"
ग्वादर एयरपोर्ट खूबसूरत लेकिन खतरनाक भी
ग्वादर को एक शानदार और रणनीतिक जगह बताया जाता है। यहां के समुद्री तटों और खूबसूरत पहाड़ों को देखकर लगता है कि यह जगह पर्यटन का बड़ा केंद्र बन सकती है। लेकिन सच्चाई यह है कि यहां की यात्रा करना मुश्किल और खतरनाक दोनों है। ग्वादर में पहले से एक छोटा घरेलू हवाई अड्डा है, जहां से केवल कराची के लिए हफ्ते में तीन उड़ानें चलती हैं। नए ग्वादर एयरपोर्ट के खुलने के बावजूद अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शुरू नहीं हुई हैं।
बलूचिस्तान के हालात वैसे भी पाकिस्तान के अन्य हिस्सों से अलग हैं। यहां अलगाववाद, गरीबी और असमानता चरम पर है। पाकिस्तान सरकार इसे अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि कह रही थी, लेकिन हकीकत यह है कि इसका स्थानीय लोगों को कोई फायदा नहीं हुआ है।
ऐसे में अब सवाल यह उठता है कि क्या यह एयरपोर्ट कभी चालू होगा? तो हम आपको बता दें कि ग्वादर एयरपोर्ट का भविष्य अभी भी अंधकार में है। जब से इसका उद्घाटन हुआ है, तब से कोई साफ जानकारी नहीं दी गई है कि इसे आम जनता के लिए कब खोला जाएगा। सरकार अब भी कह रही है कि यह एयरपोर्ट "जल्द ही" चालू हो जाएगा, लेकिन ग्वादर के लोग अब इस पर भरोसा नहीं कर रहे। उनके लिए यह एयरपोर्ट एक सफेद हाथी बन चुका है – यानी एक ऐसा प्रोजेक्ट जिस पर बहुत पैसा खर्च हुआ लेकिन जिसका कोई फायदा नहीं।
ग्वादर एयरपोर्ट पाकिस्तान की विकास की हकीकत को उजागर करता है। यह एयरपोर्ट दिखाता है कि कैसे पाकिस्तान ने बड़े-बड़े सपने दिखाए, लेकिन जमीनी सच्चाई कुछ और निकली। 24 करोड़ डॉलर का यह एयरपोर्ट अब तक वीरान पड़ा है। न कोई यात्री, न कोई विमान, न कोई उड़ान। स्थानीय लोगों को इसमें कोई रोजगार नहीं मिला। CPEC से बलूचिस्तान के हालात और बदतर हो गए। यह एयरपोर्ट पाकिस्तान के लिए कम, चीन के लिए ज्यादा बना है।
क्या पाकिस्तान इस एयरपोर्ट को सही मायनों में काम में ला पाएगा, या यह सिर्फ एक राजनीतिक प्रोपेगेंडा बनकर रह जाएगा? यह सवाल अभी भी अनुत्तरित है। लेकिन ग्वादर के लोग इस बात को अच्छी तरह समझ चुके हैं कि यह विकास उनके लिए नहीं था।

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