MONDAY 07 APRIL 2025
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बांग्लादेशी कट्टरपंथियों के इशारे पर नाच रहे मोहम्मद युनुस, सत्ता परिवर्तन के 4 महीने बाद कैसे हैं बांग्लादेश के हालात?

बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमले के बाद मुख्य सलाहकार लगातार घिरते जा रहे हैं। बांग्लादेश में लॉ एंड ऑर्डर पूरी तरीके से फेल नजर आ रहा है। देश की पूरी बागडोर युनुस की जगह कट्टरपंथी संभाल रहे हैं। मोहम्मद यूनुस कट्टरपंथियों के हाथों की कठपुतली बन गए हैं। आखिर सत्ता परिवर्तन के 4 महीने बाद कैसे हैं बांग्लादेश के हालात ? जाने यहां

बांग्लादेशी कट्टरपंथियों के इशारे पर नाच रहे मोहम्मद युनुस, सत्ता परिवर्तन के 4 महीने बाद कैसे हैं बांग्लादेश के हालात?
बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के 4 महीने बाद भी हालात काफी खराब हैं।  हिंदुओं को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। कट्टरपंथियों के इशारे पर बांग्लादेश के अंतरिम सरकार के प्रमुख नाच रहे हैं। एक तरीके से कहा जाए तो मोहम्मद युनुस सिर्फ एक कठपुतली बनकर रह गए हैं। जो कट्टरपंथियों के द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे हैं। देश की आर्थिक और राजनीतिक दिशा पूरी तरीके से बर्बाद हो चुकी है। सरकार बदलने के बाद उम्मीद थी कि जिस तरीके से शेख हसीना ने बांग्लादेश को मजबूत किया है। वैसा ही कुछ कार्यकाल मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस का भी होगा। लेकिन मोहम्मद यूनुस के आने से ठीक उलट हुआ। बांग्लादेश का माहौल पूरी तरीके से अशांत लग रहा है। कट्टरपंथियों की आग में हिंदू समुदाय झुलस रहा है। ऐसा लग रहा है कि बांग्लादेश की सरकार को मोहम्मद यूनुस नहीं बल्कि कट्टरपंथी चला रहे हैं। अब हम सभी के लिए यह जानना जरूरी है कि शेख हसीना और मोहम्मद युनुस में आर्थिक से लेकर फॉरेन पॉलिसी के मामले में कौन बेहतर था ? वर्तमान में बांग्लादेश का क्या हाल है ? 

बांग्लादेश में क्यों हुआ सत्ता परिवर्तन?


बता दें कि बांग्लादेश में सरकारी नौकरियों में आरक्षण सुधार को लेकर बीते जून महीने से लगातार प्रदर्शन चल रहा था। इस प्रदर्शन में शामिल सभी लोगों की मांग थी कि कोटा नहीं बल्कि योग्यता के आधार पर नौकरी मिले।  दरअसल, बांग्लादेश में सरकारी नौकरी का एक तिहाई हिस्सा उन लोगों के लिए आरक्षित था। जिनके पूर्वजों ने साल 1971 में बांग्लादेश की आजादी आंदोलन में भाग लिया था। इस नियम से मेरिट वालों की संभावना बहुत कम हो जाती। इसी मांग को लेकर बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना घिर गई। जानकारी के लिए बता दें कि पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना बांग्लादेश के संस्थापक नेता शेख मुजीबुर्रहमान की बेटी हैं। उन पर इस तरह के भी आरोप लगाए गए कि उन्होंने जानबूझकर 30 प्रतिशत सीटें आजादी के समय के पूर्वजों के परिवार के लिए आरक्षित कर रखा है। जून से शुरू हुआ प्रोटेस्ट अगस्त तक भयंकर रूप ले चुका था। 5 अगस्त को हालात ऐसे बन गए  कि बांग्लादेश सरकार में तख्तापलट हो गया। 
शेख हसीना बांग्लादेश छोड़कर विदेश भाग गई। ‌ उन्होंने भारत की राजधानी दिल्ली में शरण लिया। बांग्लादेशी प्रदर्शनकारियों ने पीएम हाउस से लेकर सभी सरकारी आवासों में जमकर तोड़फोड़ की। इसके बाद मोहम्मद यूनुस को बांग्लादेश के अंतरिम सरकार के प्रमुख के तौर पर चुना गया। 

अल्पसंख्यकों पर लगातार हो रहे हमले 


नोबेल पुरस्कार विजेता रह चुके युनुस से देश और दुनिया को बड़ी उम्मीद थी कि वह बांग्लादेश की स्थिति को संभाल सकेंगे। लेकिन इसका उलट हुआ। देश में लॉ एंड ऑर्डर की स्थिति और भी ज्यादा खराब हो गई। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा कि "बांग्लादेश अल्पसंख्यकों के लिए कभी भी सुरक्षित नहीं था। ऐसे में हसीना सरकार का गिरना इनको और कमजोर कर गया।" इस समय बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर लगातार हमले हो रहे हैं। इनमें सबसे बड़ी वजह है कि यह अधिकतर अल्पसंख्यक वोटर्स शेख हसीना पार्टी के समर्थक रहे हैं। यही वजह है कि बांग्लादेश में इन्हें हर एक मोर्चे पर हिंसा झेलनी पड़ रही है। इस्कॉन मंदिर के चिन्मय दास के साथ कई अन्य नेताओं की गिरफ्तारी ये तमाम ऐसे सबूत है। जो यह साबित करते हैं कि अल्पसंख्यक कितने ज्यादा खतरे में है। बता दें कि इस्कॉन संस्था से जुड़े करीब 17 खातों को भी बांग्लादेश सरकार ने फ्रीज कर दिया है। इस्कॉन संस्था की दुनिया भर में मंदिर है। ऐसे में बांग्लादेश पूरी दुनिया की नजरों में घिर गया है और जमकर आलोचना झेल रहा है। 

कैसी है बांग्लादेश की वर्तमान अर्थव्यवस्था? 


बांग्लादेश के अंतरिम सरकार के प्रमुख मुख्य  के रूप में कार्य कर रहे मोहम्मद यूनुस को अर्थव्यवस्था मामले में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। ऐसे में उम्मीद जताई जा रही थी कि बांग्लादेश के आर्थिक हालात बेहतर होंगे। लेकिन कोविड के बाद से ही बांग्लादेश की हालात बिगड़ती जा रही है। यूनुस के आने के बाद पॉलिसी को लेकर कोई भी कदम नहीं उठाया गया। बांग्लादेशी मीडिया ने कहा कि देश में मंदी के हालात बनते जा रहे हैं। 

बांग्लादेश में कब होंगे चुनाव? 


बांग्लादेश के अंतरिम सरकार के प्रमुख के तौर पर काम कर रहे मोहम्मद यूनुस के आने के बाद कहा जा रहा था कि अगले 3 महीने के अंदर चुनाव हो जाएंगे। लेकिन 4 महीने बीत जाने के बाद भी चुनाव को लेकर कोई भी तैयारी या किसी भी तरह खबर नहीं आ रही। शेख हसीना के देश छोड़ने के बाद उनकी पार्टी अवामी लीग को बैन करने की बात भी कहीं जा रही है। ऐसे में शेख हसीना की पार्टी को बैन करने के बाद बांग्लादेश की जनता के सामने सिर्फ नेशनल पार्टी एकमात्र विकल्प होगा। जो बांग्लादेश के डेमोक्रेटिक के लिए 
अच्छा नहीं है। 

पड़ोसी देशों के साथ कैसे हैं बांग्लादेश के रिश्ते? 


फॉरेन पॉलिसी को लेकर बांग्लादेश में कुछ बेहतर नहीं दिखाई दे रहा। बांग्लादेश की प्रधानमंत्री रह चुकी शेख हसीना पर इस तरह का आरोप लगा है कि वह भारत के लिए काफी नरम रहती थी। शेख हसीना की जीत में विपक्षी दलों की पार्टियों ने भारत द्वारा दखलंदाजी का भी आरोप लगाया था। यूनुस ने सितंबर महीने में पड़ोसी मुल्कों के साथ अच्छे रिश्ते की बात कही थी। लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं दिखाई दे रहा। भारत के अलावा किसी अन्य पड़ोसी मुल्कों के साथ भी बांग्लादेश के रिश्ते अच्छे नहीं है। पाकिस्तान से बांग्लादेश के रिश्ते तो पहले से ही अच्छे नहीं रहे हैं। म्यांमार से भी बांग्लादेश पूरी तरीके से त्रस्त है। दरअसल, वहां दो धार्मिक समुदायों के बीच चल रही झड़प में अधिकतर रोहिंग्या बांग्लादेश में जाकर शरण लेते रहे हैं। हालांकि शुरुआत में यूएन के कहने पर हालात अच्छे बने थे। लेकिन बाद में रिश्ते बिगड़ने लगे। बांग्लादेश की जनता इस तरह का भी आरोप लगाती है कि बाहरियों के दखलंदाजी से यहां की शांति व्यवस्था काफी ज्यादा कमजोर हो रही है। रोहिंग्याओं का आरोप है कि देश ने हमें शरण तो दे दिया। लेकिन व्यवस्था नहीं की। कॉक्स बाजार को दुनिया का सबसे बड़ा शरणार्थी कहा जाता है। लेकिन वहां पर भयानक मंजर है और स्थिति डराने वाली है। बांग्लादेश रोहिंग्या को वापस भेजने की भी कोशिश कर रही है। लेकिन अभी तक असफल रही है। कुल मिलाकर देखा जाए तो बांग्लादेश आर्थिक और शांतिपूर्ण दोनों स्थिति से निपटने में नाकामयाब है। कट्टरपंथियों द्वारा अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमले बांग्लादेश की छवि को और भी खराब कर रहा है। भारत जो कि शेख हसीना सरकार में हमेशा से उसका अहम सहयोगी रहा है। लेकिन शेख हसीना के प्रधानमंत्री पद से हटने के बाद भारत किसी भी तरीके से बांग्लादेश को आर्थिक मदद नहीं पहुंचा रहा।

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