Delhi Election Result: Ajit Anjum, Sushant Sinha, Rajdeep Sardesai जैसे पत्रकारों ने क्या कहा ?
Delhi Election Result: दिल्ली में बीजेपी ने जैसे ही रचा इतिहास और केजरीवाल की हुई हार तो Ajit Anjum, Sushant Sinha, Rajdeep Sardesai जैसे पत्रकारों ने क्या कहा ?

राजधानी दिल्ली में बीजेपी आखिरी बार 1998 में सत्ता में थी जब सुषमा स्वराज मुख्यमंत्री थीं। उसके बाद 27 साल बीत गए बीजेपी सत्ता में नहीं आई। अब जाकर ढाई दशक बाद मोदी राज में प्रचंड बहुमत के साथ बीजेपी राजधानी दिल्ली की सत्ता में आई तो बीजेपी समर्थक भी जहां झूमने लगे, तो वहीं पत्रकार भी बीजेपी की जीत पर तरह तरह के रिएक्शन दे रहे हैं। यूट्यूब चैनल चलाने वाले पत्रकार अजीत अंजुम ने तो एक ट्वीट में लिखा, "अरविंद केजरीवाल खुद चुनाव हारे, सिसोदिया हारे, पार्टी के कई दिग्गज हारे, आम आदमी पार्टी के लिए बहुत बुरा संकेत"
दिग्गज पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने दिल्ली चुनाव के नतीजों पर लिखा...
"दिल्ली में कहानी के भीतर कहानी है, कांग्रेस ने एक भी सीट नहीं जीती, लेकिन AAP को बहुत नुकसान पहुंचाया, 13 निर्वाचन क्षेत्रों में कांग्रेस के उम्मीदवारों को भाजपा और AAP के बीच के अंतर से ज्यादा वोट मिले, (एक निर्वाचन क्षेत्र में कांग्रेस दूसरे स्थान पर रही)। अगर AAP और कांग्रेस साथ मिलकर चुनाव लड़ते, तो दिल्ली में कई और सीटों पर कड़ी टक्कर देखने को मिलती, एक तरह से, कांग्रेस ने AAP के साथ वही किया है जो AAP ने 2022 में गोवा में कांग्रेस के साथ किया था। शायद 2013 में AAP द्वारा कांग्रेस के वोट छीनने का बदला लिया गया हो, लेकिन यहां मुख्य सवाल यह है: क्या भारत गठबंधन खत्म हो गया है?"
एक और पत्रकार सुशांत सिन्हा ने बीजेपी की जीत और केजरीवाल की हार पर लिखा...
"अरविंद केजरीवाल की सियासी पारी की ये पहली बड़ी हार है, जिन राज्यों में वो हारे वहां उनकी मौजूदगी ना के बराबर थी, लेकिन इस बार वो अपना गढ़ हार गए, बावजूद इसके उनका पहला रिएक्शन बहुत सधा हुआ आया, उन्होंने कांग्रेस और बाकियों की तरह ना तो EVM का रोना रोया ना चुनाव आयोग पर ठीकरा फोड़ा, मात्र 600 वोट से हारने वाले मनीष सिसोदिया ने भी विनम्रता से हार स्वीकार की, कोई सिस्टम के खिलाफ रोना नहीं रोया, टीम केजरीवाल का हार को राजनीतिक परिपक्वता के साथ स्वीकार करना इसलिए सुखद है क्योंकि बाकी का इंडी अलायंस तो कभी अपनी गलती और कमी मानता ही नहीं और जनता के जनादेश का एक तरह से अपमान करता है, राहुल गांधी एंड टीम को सीखना चाहिए। कांग्रेस जीरो पर होते हुए भी ऐसे अहंकार में रहती है जिसका कोई हिसाब नहीं"
पत्रकार सुशांत सिन्हा ने आम आदमी पार्टी को मिली हार को एक बड़ी हार तो बताया ही है, इसके साथ ही जिस सादगी के साथ आम आदमी पार्टी के नेता अपनी हार को स्वीकार कर रहे हैं, उसकी भी खूब तारीफ की है। क्योंकि इससे पहले तमाम सियासी पार्टियां चुनाव हारते ही खुद में कमियां बताने की बजाए कभी चुनाव आयोग पर सवाल उठाने लगते हैं तो कभी ईवीएम को कोसने लगते हैं, लेकिन आम आदमी पार्टी के एक भी नेता ने ना तो चुनाव आयोग पर सवाल उठाए और ना ही ईवीएम का रोना रोया।