दुनिया का इकलौता देश जो कभी नहीं हुआ किसी का गुलाम! जानिए क्यों?
नेपाल दुनिया का वह अनोखा देश है, जो कभी गुलाम नहीं हुआ और इसलिए स्वतंत्रता दिवस भी नहीं मनाता। भले ही इसे एक छोटा और कमजोर देश माना जाता हो, लेकिन इसकी गोरखा सेना इतनी बहादुर थी कि मुगलों से लेकर ब्रिटिश हुकूमत तक कोई भी इसे अधीन नहीं कर सका। नेपाल पर कई बार हमले हुए, लेकिन हर बार इसने अपनी आज़ादी को बचाए रखा।

दुनिया के लगभग हर देश ने कभी न कभी गुलामी का दौर झेला है। कभी बाहरी हमलावरों के अधीन आए, तो कभी किसी साम्राज्य का हिस्सा बने। लेकिन हिमालय की गोद में बसा नेपाल एक ऐसा देश है, जो भले ही छोटा और सैन्य रूप से कमजोर माना जाता हो, फिर भी यह कभी किसी का गुलाम नहीं बना। यही कारण है कि नेपाल को स्वतंत्रता दिवस मनाने की जरूरत ही नहीं पड़ी। लेकिन सवाल उठता है कि आखिर नेपाल पर कभी किसी बाहरी ताकत ने राज क्यों नहीं किया?
नेपाल पर हुए आक्रमण
अगर कोई यह सोचता है कि नेपाल पर कभी किसी ने हमला करने की हिम्मत नहीं की, तो यह गलत होगा। नेपाल पर भी कई बार हमले हुए, लेकिन हर बार इस छोटे से देश ने बड़ी ताकतों को धूल चटाई। इतिहास के पन्नों को पलटें, तो नेपाल पर सबसे पहला बड़ा हमला 1349 में बंगाल के सुल्तान शमसुद्दीन इलियास शाह ने किया था। उसकी सेना ने काठमांडू तक लूटपाट की, लेकिन नेपाल के योद्धाओं ने जल्दी ही उसे खदेड़ दिया। इसके बाद 18वीं सदी में बंगाल के नवाब मीर कासिम ने नेपाल पर हमला किया। उसे लगा कि नेपाल की सेना कमजोर है और उसे आसानी से हराया जा सकता है, लेकिन हुआ इसके उलट। नेपाल की बहादुर गोरखा सेना ने मीर कासिम की सेना को बुरी तरह से हरा दिया और उसे पीछे हटने पर मजबूर कर दिया।
अंग्रेजों से टकराव और सुगौली संधि
नेपाल के इतिहास में सबसे बड़ा संघर्ष ब्रिटिश साम्राज्य के साथ हुआ। जब अंग्रेज भारत में अपना विस्तार कर रहे थे, तब उन्होंने नेपाल को भी अपने अधीन करने की योजना बनाई। 1814-1816 में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी और नेपाल के बीच गोरखा युद्ध हुआ। यह युद्ध बेहद घातक था और दोनों ओर से भारी संख्या में सैनिक मारे गए। अंग्रेजों को लगा था कि नेपाल की सेना जल्दी हार मान लेगी, लेकिन गोरखा सैनिकों की बहादुरी ने उन्हें चौंका दिया। नेपाल की भौगोलिक स्थिति भी उसके पक्ष में थी, ऊँचे पहाड़ों और दुर्गम इलाकों की वजह से अंग्रेजों की सेना को नेपाल में घुसने में भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। और अंत युद्ध किसी नतीजे पर नहीं पहुँचा और 1816 में सुगौली संधि पर हस्ताक्षर किए गए। इस संधि के तहत नेपाल ने कुछ क्षेत्रों (जैसे कुमाऊँ और गढ़वाल) को ब्रिटिश शासन को सौंप दिया, लेकिन इसके बदले अंग्रेजों ने नेपाल पर दोबारा हमला न करने का वचन दिया।
नेपाल कभी गुलाम क्यों नहीं हुआ?
नेपाल के कभी गुलाम न होने के पीछे कई बड़े कारण हैं। पहली भौगोलिक सुरक्षा, नेपाल हिमालय की गोद में बसा है, जो इसे स्वाभाविक रूप से दुर्गम बनाता है। ऊँचे पहाड़ों और घने जंगलों के कारण किसी भी बाहरी ताकत के लिए इसे पूरी तरह जीतना बेहद मुश्किल था। दूसरी गोरखा सेना की वीरता, नेपाल की गोरखा सेना दुनिया की सबसे बहादुर सेनाओं में गिनी जाती है। ‘जय महाकाली, आयो गोरखाली’ के नारे के साथ ये सैनिक लड़ते हैं और अपनी जान की परवाह नहीं करते। अंग्रेज भी गोरखाओं की बहादुरी से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने बाद में गोरखा रेजीमेंट बनाई, जो आज भी ब्रिटिश और भारतीय सेनाओं का हिस्सा है। तीसरी राजनीतिक कुशलता, नेपाल के शासकों ने समय-समय पर समझौतों और रणनीतिक गठबंधनों का सहारा लेकर देश को गुलाम होने से बचाए रखा। जैसे कि सुगौली संधि के तहत नेपाल ने कुछ ज़मीन देकर अंग्रेजों के साथ शांति समझौता किया, लेकिन अपनी स्वतंत्रता को बरकरार रखा। चौथी औपनिवेशिक शक्तियों की रुचि कम होना, नेपाल संसाधनों से समृद्ध देश नहीं था। अंग्रेजों के लिए भारत, श्रीलंका और बर्मा जैसे देशों की तुलना में नेपाल की रणनीतिक और आर्थिक महत्ता कम थी। इसलिए उन्होंने इसे पूर्ण रूप से कब्जाने की कोशिश नहीं की।
नेपाल में स्वतंत्रता दिवस क्यों नहीं मनाया जाता?
हर देश जो कभी गुलाम रहा, वह अपने आज़ादी के दिन को बड़े धूमधाम से मनाता है। जैसे भारत 15 अगस्त को, अमेरिका 4 जुलाई को, और फ्रांस 14 जुलाई को स्वतंत्रता दिवस मनाता है। लेकिन नेपाल के इतिहास में गुलामी का कोई अध्याय ही नहीं रहा, इसलिए यहां स्वतंत्रता दिवस मनाने की जरूरत ही नहीं पड़ी। नेपाल एकमात्र ऐसा देश नहीं है जो स्वतंत्रता दिवस नहीं मनाता, लेकिन यह उन चुनिंदा देशों में से एक है जो कभी औपनिवेशिक शासन के अधीन नहीं रहा। इसी कारण नेपाल की पहचान दुनिया के सबसे स्वतंत्र देशों में होती है।
आज नेपाल एक लोकतांत्रिक गणराज्य है और इसकी अपनी अलग सांस्कृतिक पहचान है। हालांकि इसे भारत और चीन जैसे बड़े देशों के बीच संतुलन बनाकर चलना पड़ता है, लेकिन यह अपनी संप्रभुता को बनाए रखने में सफल रहा है। नेपाल के लोग अपनी स्वतंत्रता को लेकर बेहद गर्व महसूस करते हैं।
नेपाल का इतिहास यह साबित करता है कि ताकत सिर्फ विशाल सेना या आधुनिक हथियारों में नहीं होती, बल्कि आत्मबल, रणनीति और भौगोलिक स्थिति भी किसी देश की रक्षा करने में अहम भूमिका निभाती है। नेपाल ने कई बड़े हमलों को झेला, लेकिन कभी गुलाम नहीं हुआ। यही वजह है कि यह दुनिया के उन दुर्लभ देशों में से एक है, जिसे स्वतंत्रता दिवस मनाने की जरूरत नहीं पड़ी।
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