पीएम मोदी ने विदेशी चिंगारी वाला बयान देकर विपक्ष पर साधा निशाना, कहा- पहली बार सत्र से पहले नहीं दिखी विदेशी चिंगारी
पीएम मोदी ने बजट सत्र शुरू होने से पहले बड़ा बयान दिया और कहा कि 2014 के बाद यह पहला मौका है जब संसद सत्र से पहले कोई विदेशी विवाद खड़ा नहीं हुआ। पीएम मोदी का ये बयान विपक्ष पर हमले के तौर पर देखा जा रहा है, क्योंकि पिछले दिनों जब भी संसद सत्र की शुरूआत हुई विपक्ष से पहले ही कई मुद्दों पर सरकार को घेरा। चाहे हिंडनबर्ग हो पेगासस का मुद्दा हो या विदेशी एनजीओ से जुड़े मामले..

संसद सत्र की शुरुआत हुई। और जैसे ही पीएम मोदी ने संसद परिसर में क़दम रखा। कांग्रेस की ज़मीन ही हिला डाली। क्योंकि पीएम मोदी ने संसद परिसर में खड़े होकर जो पहला बयान दिया। उससे कांग्रेस को तो तकलीफ़ हुई ही। साथ साथ ही मोदी सरकार के ख़िलाफ़ साज़िश रचने वाली विदेशी ताक़तें भी हिल उठी। क्योंकि पीएम मोदी ने सत्र की शुरुआत होने के चंद मिनट पहले धमाकेदार बयान देते हुए कहा। इस बार सत्र शुरू होने से पहले विदेशी चिंगारी नहीं भड़की, विदेश से आग लगाने की कोशिश नहीं हुई।
पीएम मोदी ने एक तीर से कई निशाने लगाकर विरोधियों को छलनी कर दिया। क्योंकि उनके बयान से ना सिर्फ़ विपक्ष हैरान है। बल्कि राहुल गांधी सबसे ज़्यादा परेशान भी है। क्योंकि पीएम मोदी के इस बयान के तगड़े मायने हैं। दरअसल इससे पहले जो शीतकालीन सत्र हुआ था तभी कई ऐसे मुद्दे उठे थे जिनका सीधा कनेक्शन मोदी सरकार को बदनाम करने के लिए विदेश से था।और इन मुद्दों को उठाने वाला या इनमें फँसने वाला कोई और नहीं राहुल गांधी और कांग्रेस ही थी। चलिए पन्ने पलटते हुए विदेशी चिंगारी पर बात करते हैं। बात चाहे जॉर्ज सोरोस के जिन की रही हो। या फिर कांग्रेस की फंडिंग की। विदेशी हस्तक्षेप ने विवाद काफ़ी ज़्यादा बड़ा दिया था। लेकिन इस बार सत्र से पहले विदेशों से मोदी सरकार के ख़िलाफ़ कोई जिन्न बाहर नहीं आया। यानी कोई मुद्दा नहीं उछला। शायद विपक्ष महाकुंभ की घटना में उलझा रह गया। इसलिए पीएम मोदी ने इस बात पर चुटकी ली। तो चलिए ये भी बता देते हैं कि विदेशी चिंगारी से मोदी क्या संकेत दे रहे हैं।जो कांग्रेस की टेंशन बढ़ा रही है। दरअसल राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि पीएम मोदी का इशारा उन घटनाओं की ओर था। जिन्हें लेकर बीते दिनों विपक्ष ने संसद में हंगामा काटा। या फिर विदेश मंच से बैठक कुछ नेताओं ने सत्र से पहले सरकार के ख़िलाफ़ माहौल बनाया। तो चलिए एक एक कर विदेशी ताक़तों वाले सभी मुद्दे गिनवाते है। तो सबसे पहले आता है।
हिंडनबर्ग की रिपोर्ट पर संसद में बवाल- अमेरिकी शॉर्ट सेलर कंपनी हिंडनबर्ग रिपोर्ट ने अडानी समूह पर गंभीर आरोप लगाए, जिससे अड़ानी ग्रुप को भारी नुसकान हुआ।हालाँकि अमेरिकी सरकार की तरह से इन आरोपों पर अड़ानी ग्रुप को हरी मिल गई। लेकिन विपक्ष देश से लेकर विदेश तक अड़ानी के मुद्दे को भुनाया। सरकार और अड़ानी की सांठगांठ का आरोप लगाया। मोदी को बदनाम करने की कोशिश की। राहुल गांधी विदेशी मंच पर खूब माहौल बनाते दिखे। लेकिन तमाचा तब पड़ा जब अमेरिका से अड़ानी को हरी झंडी मिल गई।और हिंडनबर्ग ने आख़िर में आकर अपनी दुकान बंद करने का ऐलान कर डाला।
पेगासस रिपोर्ट- इजरायली स्पाइवेयर पेगासस के इस्तेमाल पर बड़ा खुलासा करते हुए विपक्ष ने संसद सत्र से पहले आरोप लगाया कि सरकार उनकी जासूसी करवा रही है। इसपर संसद में भी राहुल गांधी से लेकर तमाम विपक्षी नेताओं ने जमकर हाथ पाँव मारे, लेकिन आख़िर में क्या हुआ सबने देखा। विपक्ष अपने आरोपों में ख़ुद ही फंस गया। क्योंकि मोदी सरकार कांग्रेस नेताओं पर आरोप लगाते हुए जॉर्ज सोरोस का मुद्दा विदेश से लाई। जिसमें राहुल गांधी से लेकर सोनिया गांधी तक पर छींट गिराई गई। खैर जैसे ही पीएम मोदी का विदेशी चिंगारी वाला बयान आया,सबसे पहले मिर्ची भी कांग्रेस को ही लगी। प्रियंका गांधी पलटवार करते हुए कहा की प्रधानमंत्री असल मुद्दों पर कब बात करेंगे।
खैर येबात किसी से छुपी नहीं है कि जब जब राहुल गांधी विदेशी मंच पर पहुँचे हैं। मोदी सरकार के जमकर बोले हैं। बीते दिनों राहुल गांधी ने तो विदेश में बैठकर यहाँ तक आरोप लगा दिया था कि संसद में बोलने नहीं दिया जाता। माइक बंद कर दिए जाते हैं। हालाँकि सरकार ने उनके बयान को झूठ करार दिया। लगाया। कि जब राहुल अपने बयान से देश में माहौल नहीं बना पाते। तो विदेशी मंच पर झूठ फैलाने बैठ जाते हैं। यही वजह है कि संसद में एंट्री करते ही जैसे पीएम मोदी ने बयान दिया। तुरंत कांग्रेस बौखला उठी।
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