गौतम अडानी से पंगा लेने वाली हिंडनबर्ग रिसर्च की दुकान पर ताला, फाउंडर ने किया बंद का ऐलान
अडानी ग्रुप में भूचाल लाने वाली अमेरिका की शॉर्ट सेलिंग फर्म हिंडनबर्ग रिसर्च बंद हो गई है। कंपनी के फाउंडर नाथन एंडरसन ने खुद इसकी घोषणा की है। एंडरसन ने कंपनी को बंद करने के कारणों का खुलासा नहीं किया है लेकिन यह फैसला ऐसे समय लिया गया है जबकि 20 जनवरी को अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप की राष्ट्रपति के तौर पर वापसी हो रही है।

एक कहावत है दूसरों के लिए गड्ढा खोदने वाले खुद उसमे गिरते हैं।और ये कहावत पूरी हुई है अमेरिका की शॉर्ट सेलिंग फर्म हिंडनबर्ग रिसर्च के साथ। क्योंकि अब तक हिंडनबर्ग का नाम आते ही जेहन में एक ही सवाल खड़ा होता था कि किसी कंपनी या दिग्गज रईस को लेकर कोई खुलासा होने वाला है। पहले खुलासा होता और फिर शॉर्ट सेलिंग से मोटी कमाई का खेल लंबे समय से चल रहा था। गौतम अडानी, सेबी चीफ माधुरी पुरी बुच समेत कई विदेशी हस्तियां इसकी शिकार हो चुकी है। लेकिन अब मोदी सरकार को बदनाम करने।और अडानी ग्रुप को हिलाने की साजिश रचने वाली हिंडनबर्ग रिसर्च की दुकान बंद हो रही है।
अडानी से पंगा लेकर खुद ही हिंडनबर्ग तबाही की कगार पर पहुंच गया है। खुद कंपनी के फाउंडर नाथन एंडरसन ने ऐलान किया है कि उन्होने कंपनी को बंद करने का फैसला किया है। जिससे ग्राउंड ब्रेकिंग फाइनेंशियल इन्वेस्टिगेशन युग का अंत हो गया है।हिंडनबर्ग के संस्थापक ने बकायदा एक भावुक पोस्ट के जरिए अपने सफर, संघर्ष और कामयाबी के बारे में बताया। एंडरसन ने नोट में लिखा-"मैंने पिछले साल के अंत में ही अपने परिवार, दोस्तों और हमारी टीम के साथ ये बात शेयर की थी कि मैं हिंडनबर्ग रिसर्च को बंद करने का निर्णय ले रहा हूं। हमने जो विचार किए थे, उन्हें पूरा करने के बाद इसे खत्म करना था आज आखिरी मामलों को नियामकों के साथ शेयर करने के बाद वो दिन आ गया है"
अपने नोट में आगे भी हिंडनबर्ग के स्थापक ने तमाम बातें कही ।लेकिन एक बात जो उन्होंने कही उसपर सबका ध्यान जा रहा है। वो है जिस मकसद के लिए हिंडनबर्ग बना वो पूरा हो चुका है। अब ये मकसद क्या था। क्या अडानी के जरिए मोदी सरकार को बदनाम करना हिंडनबर्ग की कोशिश थी। खैर अब हिंडनबर्ग की अब जड़े हिल चुकी है।
बता दें कि 2017 में अपनी स्थापना के बाद से हिंडनबर्ग ने भारत की मोदी सरकार को बदनाम करने के लिए गहरा एजेंडा चलाया। जमकर अडानी को लेकर झूठ फैलाया।जिसकी वजह से शेयर मार्केट, अडानी ग्रुप को भारी नुकसान हुआ। क्योंकि हिंडनबर्ग ने साल के शुरुआत में अडानी समूह पर अकाउंटिंग हेरफेर, शेयरों की ओवरप्राइसिंग के गंभीर आरोप लगाकर चौंकाने वाला खुलासा किया। हिंडनबर्ग के खुलासे के बाद अडानी को बड़ा झटका लगा। अडानी समूह के सभी शेयर धड़ाम हो गए। हिंडनबर्ग की आंधी में अडानी की आधी से अधिक दौलत स्वाहा हो गई। अडानी पर एजेंसियों ने जांच शुरू कर दी। अडानी का मार्केट कैप 100 करोड़ रुपये से अधिक तक गिर गया। सड़क से लेकर संसद तक अडानी मामले को लेकर हंगामा हो गया, लेकिन विपक्ष को उस वक्त तमाचा पड़ा। जब अडानी को अमेरिका की सरकार ने जोरदार तमाचा मारा हिंडनबर्ग की रिपोर्ट को झूठ और अडानी को क्लीनचिट दे दी। अडानी को क्लीनचिट मिलते ही हिंडनबर्ग खुद ब खुद तबाह हो गया। हिंडनबर्ग सिसर्च ने ऐसे समय पर बंद होने की घोषणा की है। जब कुछ ही दिनों में डोनाल्ड ट्रंप की वाइट हाइस में वापसी होने वाली है। तो ऐसा क्या हुआ कि हिंडनबर्ग को अपनी दुकान बंद कर भागना पड़ा।क्या हिंडनबर्ग को आगे किसी जांच की आंच का डर है इसका अभी पता नहीं चल पाया है।
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