संभल हिंसा में शामिल शारिक साटा गैंग का एक और बदमाश वारिस अरेस्ट, दो लोगों की गोली मारकर की थी हत्या
संभल हिंसा में शामिल शारिक साटा गैंग के दूसरे आरोपी वारिस को भी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. इससे पहले मुल्ला अफ़रोज़ को अरेस्ट किया गया था. वारिस दिल्ली में छिपा हुआ था और हाल ही में संभल पहुंचा। पुलिस ने उसके पास से अवैध तमंचा और कारतूस बरामद किए हैं।

संभल हिंसा की जांच लगातार नए नए राज़ उगल रही है। जिससे शासन से लेकर प्रशासन तक की ज़मीन हिल गई है दरअसल संभल में मस्जिद सर्वे के बहाने जो हिंसा भड़की उसकी स्क्रिप्ट पहले ही लिख दी गई थी। पाकिस्तान और दुबई में बैठे शारिक साटा गैंग के लोग भीड़ को इकट्ठा कर कैसे बवाल करवाने में कामयाब रहे। खुलासे से आप भी हैरान हो जाएँगे। क्योंकि पुलिस ने जब इस गैंग के लोगों की कमर तोड़ी। सारा चिट्ठा खुलकर बाहर आ गया। हिंसा के आरोप में पहले पुलिस ने मुल्ला अफ़रोज़ को धर दबोचा। जिसने मुँह खोला। तो हिंसा में नेताओं का काला राज खोला। लेकिन अब पुलिस के हत्थे चढ़ा है है शारिक साटा गैंग का शातिर सदस्य वारिस। आरोप है कि वारिस ने हिंसा के दौरान गोली चलाकर दूसरे घरों के वारिस को ही छीन लिया। यानी दो लोगों को मौत के घाट उतार दिया। और ये दिखाने की कोशिश की गई कि दोनों लोगों की हत्या पुलिस की गोली से हुई है।
संभल हिंसा के दौरान शारिक साटा गैंग के वारिस ने की थी फायरिंग। वारिस की गोली से नईम और मोहम्मद कैफ़ की मौत हुई थी। वारिस के पास से दो मोबाइल बरामद हुए हैं, जिसमें अपराधिक गतिविधियों के सबूत हैं। आरोपी के कब्जे से एक देसी तमंचा, 2 जिंदा कारतूस, खोखा बरामद किया गया है।
वहीं जब पुलिस ने पूछताछ की तो वारिस ने दो लोगों की हत्या की बात क़बूल की है। पुलिस पूछताछ ने में वारिस ने खुलासा कि वो 24 नवंबर को हुए बवाल में शामिल था और गोली भी चलाई थी। और उसकी गोली से ही दो लोगों की मौत हुई। इसके अलावा उसने ये भी खुलासा किया कि वो बवाल में शामिल होने के लिए शारिक साटा के कहने पर गया था। वहीं संभल के एएसपी ने खुलासा करते हुए कहा कि। "24 नवंबर को हुई हिंसा में गिरफ्तार आरोपी वारिस का मकसद बड़े स्तर पर लोगों की धार्मिक भावनाओं को भड़काकर देश भर में दंगा फैलाना था ताकि पुलिस प्रशासन की संपूर्ण व्यवस्था छिन भिन्न हो जाएं। वारदात वाले दिन इसी गैंग की ओर से वारिस को हथियार उपलब्ध करवाए गए थे गिरफ्तार आरोपी वारिस ने शारिक साठा गैंग के साथियों के उकसाने पर सक्रिय भागीदारी निभाई थी"
यानी की इस शारिक साटा गैंग का मक़सद था कि वो बड़े लेवल पर हिंसा भड़काए। जिससे ना सिर्फ़ पुलिस प्रशासन को चुनौती मिले। बल्कि योगी सरकार पर निशाने पर आए। फिर चाहे कितना भी बड़ी कत्लेआम क्यों ना मच जाए। यही वजह है कि शारिक साटा की गैंग ने जाल बिछाकर हिंसा के दौरान फ़ायरिंग करवाई। जिसमें चार लोगों की मौत हो गई। खैर अब पुलिस शारिक साटा गैंग की कमर तोड़ने का काम तो कर ही रही है। इसके साथ ही साथ उन नेताओं को भी खंगालने की कोशिश में लगी है। जो इन बदमाशों का पर्दे के पीछे से साथ दे रहे थे। क्योंकि वारिस से पहले पुलिस ने मुल्ला अफरोज को गिरफ्तार किया था। जिसने इस हिंसा में नेताओं के एंगल का खुलासा किया।और बताया था कि "24 नवंबर को दूसरे साथी को शारिक साटा एक एप पर कॉल कर कहा था कि नेता भीड़ जमा करा रहे हैं नेताओं की ओर से पूरी सपोर्ट है और हरी झंडी मिल गई है इसलिए 10 से 20 पुलिसकर्मियों और आम लोगों को मार दो इससे पुलिस प्रशासन डर जाएगा और शासन भी पुलिसकर्मियों के ख़िलाफ़ ही कार्रवाई करेगा"
हालांकि ये नेता कौन हैं। किससे इन दंगाईयों की बातचीत हो रही थी उस नाम का खुलासा नहीं हो पाया है। लेकिन ये मामला अपने आप में और ज़्यादा हाईप्रोफ़ाइल बन गया है। क्योंकि शारिक साटा गैंग के दो सदस्य पुलिस के हत्थे चढ़ चुके हैं। पहले मुल्ला अफरोज और अब वारिस। जिन्होंने पुलिस को तमाम सबूत सौंप दिए हैं। वहीं कहा जा तो ये भी जा रहा था। कि हिंसा वाले दिन आरोपी वारिस का एक ऑडियो भी वायरल हो रहा था। जिसमें उसके कथित तौर पर सामान यानी हथियार लेकर आने की बात कही गई थी। अब पुलिस इस गैंग के बाक़ी शातिर लोगों तक भी जल्द पहुंचने वाली है। जल्द संभल हिंसा को लेकर और बड़ा खुलासा हुआ है।शातिर गैंग का ख़ात्मा योगी सरकार करेगी।
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