Mohan Bhagwat से पंगा लेना Nadda को पड़ा भारी
RSS को नीचा दिखाना Nadda को पड़ा भारी, भयंकर ग़ुस्से में चलेगा हंटर, Mohan Bhagwat

यूपी के साथ साथ पूरे देश में NDA को जो सीटें मिली उसे देखकर पार्टी नाखुश है, मायूस है, उदास है, लेकिन दूसरी तरफ़ बहुमत से काफ़ी दूर INDIA अपने प्रदर्शन को देख काफ़ी उत्साहित है।INDIA को उम्मीद है कि ये आँकड़ा उसे सत्ता में क़ाबिज़ करा सकता है, अब से थोड़ी देर बाद तस्वीर साफ़ हो जाएगी कि केंद्र की सत्ता में कौन क़ाबिज़ हो रहा है और कौन नहीं लेकिन इन सबके बीच ख़बर है कि RSS प्रमुख मोहन भागवत ने बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा के ख़िलाफ़ मोर्चा खोल लिया है।
दरअसल मोहन भागवत जेपी नड्डा के उस बयान से ख़ासा नाराज़ हैं जिसमें उन्होंने कहा था कि अब हमें RSS की जरुरत नहीं है, हम अकेले ही सक्षम हैं। नड्डा के इस बयान के बाद से ही ऐसा कहा गया कि RSS का वोटबैंक पूरी तरह से पीछे हट गया। संघ के लोगों ने बीजेपी के लिए वोट ही नहीं किया जिसका ख़ामियाज़ा भुगतना पड़ रहा है। दरअसल जेपी नड्डा से हाल ही में एक सवाल पूछा गया। उनसे कहा गया - "पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के समय और अब के बीच RSS की स्थिति कैसे बदली है" ?
जवाब में नड्डा ने कहा- "शुरु में हम अक्षम होंगे, थोड़ा कम होंगे, तलब RSS की जरुरत पड़ती थी। आज हम बढ़ गए हैं और सक्षम हैं तो बीजेपी अपने आप को चलाती है। यही अंतर है "। नड्डा के इसी बयान को लेकर RSS ख़ेमे में नाराज़गी बताई जा रही है जिसका असर चुनावों पर देखने को मिला है। अब ख़बर है कि सरकार बनते ही जब मंत्रिमंडल का विस्तार होगा तो सबसे पहले नड्डा को पद से हटाया जाएगा। इतना ही नहीं मोदी शाह नड्डा का कार्यकाल बढ़ाने के अपने फ़ैसले पर भी अब पछता रहे हैं।
RSS को नीचा दिखाना नड्डा के गले की फांस बन गया है। माना जा रहा है कि अब जल्द ही उनपर बड़ा एक्शन लिया जा सकता है। आपको बता दें इसी इंटरव्यू में नड्डा से सवाल हुआ कि मथुरा और काशी में विवादित स्थलों पर मंदिर बनाने की कोई योजना है ? इस पर नड्डा ने कहा- "भाजपा के पास ऐसा कोई विचार, योजना और इच्छा नहीं है। इस पर अभी तक कोई चर्चा भी नहीं हुई। हमारा सिस्टम इश तरह से काम करता है कि पार्टी की विचटाप प्रक्रिया पार्लियामेंटरी बोर्ड में चर्चा से तय होती है। फिर मुद्दा नेशनल काउंसिल के पास जाता है"।
बहरहाल, अब आपको क्या लगता है ।नड्डा के इस बयान का ख़ामियाज़ा पूरी NDA को भुगतना पड़ा है ? या फिर कहीं और भी चूक हुई है ।
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