भारत की जेल में बंद हैं सैकड़ों ISI जासूस ! जानिये क्यों ?
भारत में पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी किस तरह से अपने मंसूबों को अंजाम दे रही है इसका अंदाज़ा आप इसी से लगाइये कि ISI भारत की जेलों तक का रास्ता देख चुका है और अपने जाससूों को वहां भेज रही है। देखिये एक रिपोर्ट।

आप सोच सकते हैं कि पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी ISI भारत के पीछे किस तरह से हाथ धोकर पड़ी है ? इसका अंदाज़ा इसी बात से लगाइये कि ISI ने भारत में अस्थिरता पैदा करने के लिए और माहौल बिगाड़ने के लिए और अपने स्लीपर सेल्स को लगातार सक्रिय बनाये रखने के लिए षड़यंत्र रच रही है। इसी कड़ी में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI की बड़ी साजिश का पर्दाफाश हुआ है जिसमें पता चला है कि ISI अपने खुफिया जासूसों को भारतीय जेल में भेज रही है। ये खुफ़िया जासूस भारतीय जेल में बंद आतंकियों तक संदेश पहुंचाने का काम करते हैं, यानि संदेशवाहक के तौर पर काम करते हैं।
ये ख़ुफ़िया जासूस अवैध तरीक़े से भारतीय सीमा में एंट्री करते हैं, फिर BSF इन्हें गिरफ्तार कर लेती हैं, जब इन्हें जेल में डाला जाता है तो ये वहां का संदेश डिलीवर कर देते हैं। मतलब जेल में बंद आतंकियों तक मैसेज पहुंचाने के लिए भी ISI अपने एजेंट को जेल में ही भेज रहे हैं। ये रणनीति है जिसका तोड़ निकालने के लिए अब भारत की सुरक्षा एजेंसी जुटी हुई हैं। आप सोचिये कई बार तो ISI के जासूस जिन्हें संदेश पहुंचाना होता है या तो नशे की हालत में मिलते हैं या फिर खुद को मानसिक तौर पर विक्षिप्त बताते हैं। ऐसे में इन घुसपैठियों के खिलाफ विदेशी और पासपोर्ट अधिनियम के तहत मामला दर्ज होता है और फिर 2-8 साल तक की सजा दी जाती है।
जो जानकारी मिली है उसके मुताबिक़ जुलाई 2024 से लेकर अब तक 10 से ज़्यादा ऐसे केस मिले हैं जिनमें ये घुसपैठिये Pok से होते हुए कश्मीर के रास्ते भारत आये। इनमें से कई को जम्मू, पंजाब और राजस्थान की जेल में भेजा गया। इनकी हरकतों और बॉडी लैंग्वेज को देखकर सुरक्षा एजेंसियों को शक हुआ कि दाल में कुछ तो काला है। ऐसे में अधिकारियों ने पूछताछ शुरू की। इसी पूछताछ में एक दो आतंकी टूटे और सच उगल दिया जिसके बाद इस पूरे षड्यंत्र का खुलासा हुआ।
आपको बताते चलें कि राजस्थान के बिजनौर गांव के एक मामले में संदेशवाहक ने ख़ुद को मानसिक विक्षिप्त बता दिया था, पूछताछ में उसने बताया कि वो भारत में ड्रग तस्करी को बढ़ावा देने के लिए आया है। साथ ही उसे BSF जवानों की तैनाती के बारे में जानकारी जुटाने के मक़सद से भी भेजा गया था। दूसरी घटना लाहौर से आये मोहम्मद असद की है। मोहम्मद असद नाम का एक शख़्स बाइक पर ज़ीरो लाइन पर चला गया था और सोचिये गिरफ़्तारी के ख़ुद इंतज़ार कर रहा था। BSF ने जब उसे जेल में डाला तो पाया गया कि वो मैसेंजर का काम कर रहा था।
सबसे गौर करने वाली जानते हैं क्या है ? ISI सिर्फ़ पुरुषों को ही नहीं बल्कि संदेश पहुंचाने के लिए महिलाओं और बच्चों का भी सहारा ले रही है। अधिकारियों ने ख़ुद इस बारे में जानकारी देते हुए बताया है कि घुसपैठ में महिलाएं और नाबालिग भी शामिल हैं, जो संदेशवाहक का काम कर रहे हैं। सरकारी आंकड़े बताते हैं कि साल 2016-2017 में लगभग दो दर्जन पाकिस्तानियों को वापस भेज दिया था। साल 2014-2016 के बीच 250 से ज़्यादा पाकिस्तानियों को उनके देश वापस भेजा गया था। निश्चित तौर पर भारत की एजेंसियों के लिए ये चुनौती तो है लेकिन इससे भी पार पाने की कोशिश लगातार की जा रही है।