रमजान अलग-अलग देशों में अलग दिन क्यों शुरू होता है? जानिए इसका विज्ञान
रमजान का चांद पूरी दुनिया में एक साथ नहीं दिखता, जिसके कारण हर देश में इसकी शुरुआत अलग-अलग दिन होती है। सबसे पहले चांद देखने की घोषणा सऊदी अरब में की जाती है, फिर भारत और पाकिस्तान में इसके अगले दिन रमजान शुरू होता है। रमजान हर देश में अलग-अलग दिन क्यों शुरू होता है और इसके पीछे का पूरा वैज्ञानिक और धार्मिक कारण जानें।

रमजान का महीना आते ही दुनिया भर के मुसलमान चांद देखने का बेसब्री से इंतजार करते हैं। लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि रमजान का चांद एक ही दिन पूरी दुनिया में नहीं दिखता? सऊदी अरब में चांद दिखाई देने के अगले दिन भारत और पाकिस्तान में रमजान की शुरुआत होती है, जबकि इंडोनेशिया में यह तीन दिन बाद तक भी हो सकता है। आखिर ऐसा क्यों होता है? इस पूरी प्रक्रिया के पीछे धार्मिक परंपराएं, भौगोलिक स्थिति और वैज्ञानिक कारण छिपे हैं, जिन्हें समझना बेहद दिलचस्प है।
रमजान का चांद सबसे पहले कहां दिखता है?
रमजान इस्लामी कैलेंडर का नौवां महीना है और इसे इस्लाम में सबसे पवित्र महीना माना जाता है। इस्लामी महीनों की गणना चंद्रमा के अनुसार होती है, न कि सूर्य के अनुसार, जैसा कि ग्रेगोरियन कैलेंडर में होता है। इस कारण हर साल रमजान 10-12 दिन पहले आता है। रमजान का चांद सबसे पहले सऊदी अरब में दिखाई देने की संभावना होती है। इसका मुख्य कारण यह है कि सऊदी अरब की भौगोलिक स्थिति ऐसी है जहां अमूमन मौसम साफ रहता है और आसमान में बादल कम होते हैं। यही कारण है कि वहां चांद देखने की संभावना अधिक होती है। सऊदी अरब में जैसे ही रमजान का चांद दिखाई देता है, वहां की धार्मिक कमेटी इसकी आधिकारिक घोषणा कर देती है और अगले दिन से रोजे शुरू हो जाते हैं।
रमजान की घोषणा कैसे होती है?
रमजान की सही तारीख तय करने के लिए तीन प्रमुख फैक्टर काम करते हैं पहला स्थानीय चांद देखने की परंपरा। यानी हर देश में रमजान की शुरुआत स्थानीय स्तर पर चांद देखने पर निर्भर करती है। धार्मिक विद्वानों और विशेषज्ञों की टीमें सूर्यास्त के समय आकाश में चांद देखने का प्रयास करती हैं। इसे ‘हिलाल’ यानी अर्धचंद्र कहा जाता है। यदि चांद दिख जाता है, तो अगले दिन रमजान की शुरुआत होती है। लेकिन कई बार, बादलों या मौसम खराब होने के कारण चांद नजर नहीं आता। ऐसे में, रमजान की घोषणा एक दिन बाद की जाती है।
2. शिया और सुन्नी परंपराओं का प्रभाव
इस्लाम मुख्य रूप से दो प्रमुख संप्रदायों में विभाजित है—शिया और सुन्नी। दोनों की धार्मिक परंपराएं चांद देखने के तरीके में थोड़ा अंतर रखती हैं। सुन्नी मुस्लिम आमतौर पर सरकार द्वारा घोषित चांद के फैसले को मानते हैं। शिया मुस्लिम अपनी धार्मिक परंपरा के अनुसार, चांद देखने के बाद ही रमजान की शुरुआत करते हैं। इस कारण कुछ देशों में रमजान की तारीख में अंतर देखने को मिलता है।
3. परिवारिक नेटवर्क और परंपरागत निर्णय
रमजान की तारीख तय करने में पारिवारिक और सामाजिक परंपराओं का भी बड़ा योगदान होता है। दक्षिण एशियाई अध्ययन के प्रोफेसर स्कॉट कुगले के अनुसार, अमेरिका या यूरोप में रहने वाले दक्षिण एशियाई मुसलमान अक्सर अपने मूल देश (भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश) की धार्मिक घोषणा के आधार पर ही रोजे शुरू करते हैं। इससे वे अपने परिवार और रिश्तेदारों के साथ धार्मिक एकता बनाए रखते हैं।
रमजान में चांद क्यों दिखता है अलग-अलग दिन?
रमजान का चांद पूरी दुनिया में अलग-अलग समय पर दिखाई देता है, जिसका मुख्य कारण खगोलीय और भौगोलिक परिस्थितियां हैं।
1. अक्षांश (Latitude) और देश की स्थिति
जो देश भूमध्य रेखा (Equator) के करीब स्थित हैं, वहां दिन और रात की लंबाई लगभग बराबर होती है। ऐसे देशों में चांद जल्दी दिखाई देता है। सऊदी अरब, अफ्रीका, और भारत जैसे देश भूमध्य रेखा के करीब हैं, इसलिए यहां चांद जल्द दिखने की संभावना रहती है। यूरोप, कनाडा, और नॉर्वे जैसे देश भूमध्य रेखा से दूर हैं, यहां चांद देर से दिखता है, और वहां रमजान की शुरुआत भी देरी से होती है।
2. मौसम और बादलों का असर
यदि किसी देश में बादल छाए हुए हैं या बारिश हो रही है, तो चांद देखना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में कई बार धार्मिक समितियों को निर्णय लेने के लिए दूसरे देशों की घोषणाओं पर निर्भर रहना पड़ता है।
3. चंद्रमा की गति और पृथ्वी का झुकाव
चंद्रमा की स्थिति हर जगह समान नहीं होती। पृथ्वी अपनी धुरी पर झुकी हुई है और चंद्रमा अलग-अलग अक्षांशों पर अलग गति से दिखाई देता है। सऊदी अरब, भारत और पाकिस्तान में चांद लगभग एक ही समय दिखता है। इंडोनेशिया और मलेशिया में चांद की स्थिति बदलने में अधिक समय लग सकता है।
4. रमजान के रोजे और समय का अंतर
चूंकि रमजान चंद्रमा के हिसाब से चलता है, इसलिए पूरी दुनिया में रोजे की अवधि समान नहीं होती। भूमध्य रेखा के करीब (जैसे भारत और सऊदी अरब) में रोजे लगभग 12-14 घंटे के होते हैं। नॉर्वे, स्वीडन, और रूस में यह समय 16-18 घंटे तक हो सकता है। आर्कटिक क्षेत्र (जैसे अलास्का) में सूरज पूरी रात नहीं छिपता, जिससे वहां के मुसलमानों को इस्लामी विद्वानों द्वारा निर्धारित समय का पालन करना पड़ता है।
अब चुकी रमजान का महीना पूरी दुनिया में अलग-अलग समय पर शुरू होता है, तो ऐसे में सबसे पहले रमजान की शुरुआत की घोषणा सऊदी अरब से होती है। इसके बाद भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देशों में रमजान की शुरुआत सऊदी अरब के अगले दिन होती है, क्योंकि यहां चांद देखने की प्रक्रिया स्थानीय धार्मिक संस्थानों द्वारा की जाती है। इंडोनेशिया और मलेशिया में रमजान की शुरुआत सऊदी अरब के मुकाबले 2-3 दिन बाद होती है। इसका कारण भौगोलिक स्थिति और मौसम से जुड़ा होता है, क्योंकि इन देशों में कई बार चांद देखने में देरी हो जाती है। यूरोप के देशों जैसे फ्रांस, जर्मनी और यूनाइटेड किंगडम में भी रमजान की शुरुआत आमतौर पर 1-2 दिन की देरी से होती है। वहीं, अमेरिका और कनाडा में भी इसी तरह का पैटर्न देखने को मिलता है, जहां रमजान सऊदी अरब के एक या दो दिन बाद शुरू होता है। वही ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में भी रमजान की शुरुआत इंडोनेशिया की तरह 2-3 दिन बाद होती है। इसका मुख्य कारण इन देशों की भौगोलिक स्थिति और धार्मिक संगठनों द्वारा चांद की पुष्टि करने की प्रक्रिया में लगने वाला समय है। इस तरह, दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में रमजान की शुरुआत में एक से तीन दिन का अंतर देखा जाता है, जो चंद्रमा की गति, मौसम और स्थानीय धार्मिक मान्यताओं पर निर्भर करता है।
अगर आप भी रमजान की शुरुआत को लेकर उत्सुक रहते हैं, तो अपने देश की आधिकारिक धार्मिक संस्था की घोषणा का इंतजार करें और अफवाहों पर भरोसा न करें। रमजान का यह पवित्र महीना सभी के लिए अच्छा हो! रमजान मुबारक!
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