रामभद्राचार्य की चौखट से योगी ने किसे बताया मारीच-सुबाहु ?
अब जब महाकुंभ अपने समापन की ओर अग्रसर है, नागा सन्यासियों ने संगम नगरी से शिव की नगरी काशी की ओर प्रस्थान कर लिया है। ऐसे में मारीच और सुबाहु का ज़िक्र क्यों किया जा रहा है, इसके पीछे की वजह है प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। जिन योगी आदित्यनाथ के पुनः मुख्यमंत्री बनने की भविष्यवाणी जगत गुरु स्वामी रामभद्राचार्य कर चुके हैं, आख़िर उन्हीं चौखट पर आकर योगी बाबा ने मारीच और सुबाहु को लेकर क्या भविष्यवाणी की ?

राम-राम जपने वाले इस बात से परिचित हैं कि मारीच रावण का मामा और सुबाहु मारीच का छोटा भाई लेकिन आज के दौर में मारीच-सुबाहु कौन है? क्या आप जानते हैं ? अब जब महाकुंभ अपने समापन की ओर अग्रसर है, नागा सन्यासियों ने संगम नगरी से शिव की नगरी काशी की ओर प्रस्थान कर लिया है। ऐसे में मारीच और सुबाहु का ज़िक्र क्यों किया जा रहा है, इसके पीछे की वजह है प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, जिन योगी आदित्यनाथ के पुनः मुख्यमंत्री बनने की भविष्यवाणी जगत गुरु स्वामी रामभद्राचार्य कर चुके हैं, आख़िर उन्हीं चौखट पर आकर योगी बाबा ने मारीच और सुबाहु को लेकर क्या भविष्यवाणी की ?
मारीच और सुबाहु कौन थे, क्या करते थे और क्यों मारे गये ? इसके लिए आप ये जान लें कि महर्षि वाल्मीकि द्वारा लिखी गई रामायण सनातन धर्म का एक ऐसा महाकाव्य , जिसमें प्रभु राम की जीवन गाथा समाई हुई है। यही कारण है कि ना सिर्फ़ राम भक्त बल्कि प्रत्येक सनातनी रामायण के हर एक किरदार से अच्छे से अवगत है। जब राक्षसों की बात होती है, तो रावण के बाद उसके मामा मारीच की बात आती है..वही मारीच जिसने रावण के कहने पर हिरण का भेष बदलकर भ्रमित करने की कोशिश की , जिसके चलते दशानंद माँ सीता का हरण करने में सफल हो पाया हालाँकि मारीच के छोटे भाई सुबाहु को भी कहीं से भी कम नहीं आँका जा सकता है, ऋषि-मुनियों के यज्ञ को अपवित्र करने में सुबाहु सबसे आगे रहता था। रामायण काल में मारीच के साथ मिलकर जब सुबाहु ने विश्वामित्र के यज्ञवेदी को बार-बार ध्वस्त करना शुरु किया। उसके इसी आतंक को देखकर लक्ष्मण ने अपने आग्नेय शास्त्र से सुबाहु का वध कर डाला। ऐसे नहीं है कि मारीच और सुबाहु त्रेतायुग में ही ख़त्म हो गये, बल्कि अभी भी यही मारीच और सुबाहु हमारे बीच हमारे इस समाज में घूम रहे हैं ? जिसकी जानकारी अबकी बार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दी है।
भले ही महाकुंभ हादसे को लेकर कई तरह के लांछन योगी आदित्यनाथ की ईमानदार छवि पर लगे हों, लेकिन उनकी लोकप्रियता में कही कमी नहीं है देश का संत समाज अभी भी योगी बाबा की ढाल बना हुआ है। महाकुंभ को लेकर योगी सरकार की व्यवस्था से आम आदमी से लेकर तमाम धर्माचार्य और साधु-सन्यासी आनंदित हैं और इसी आनंद के बीच जब बीते दिनों मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जगत गुरु स्वामी रामभद्राचार्य के शिविर में पहुँचे और यही से उन्होंने सनातन के ख़िलाफ़ षड्यंत्र करने वालों की औक़ात दिखाई महाकुंभ और राम मंदिर को सनातन संस्कृति का प्रतीक बताते हुए योगी बाबा ने ये बताने की कोशिश की कि, सनातन धर्म सुरक्षित है तो भारत सुरक्षित है और भारत सुरक्षित है तो मानवता सुरक्षित है। सनातन धर्म के पूज्य संतों और आचार्यों की परंपरा पर संदेह करने का कोई स्थान नहीं है। इस बीच उन्होंने आज के मारीच और सुबाहु से भी सावधान रहने की चेतावनी दी योगी बाबा ने ये कहा मारीच और सुबाहु सनातन धर्म के खिलाफ षड्यंत्र रच रहे हैं लेकिन इस धर्म को लाखों संतों का सानिध्य प्राप्त है, ऐसे में उसका कोई बाल भी बांका नहीं कर सकता।
मारीच और सुबाहु का ज़िक्र ऐसे समय में करना, जब महाकुंभ चल रहा हो जो ये दर्शाता है कि सनातन के प्रति योगी बाबा गंभीर और आस्थावान व्यक्ति हैं हिंदुत्व को लेकर उनका स्ट्रेट फॉरवर्ड वाला व्यक्तित्व है, हिंदू राष्ट्र की खुलकर बात करते हैं और सनातन को खंडित करने वाली ताक़तों को अपने बुलडोज़र से रौंदते हैं लेकिन क्या यहीं हिंदुत्व वाली छवि उन्हें केंद्र की राजनीति तक पहुँचा पाएगी ? और क्या सच में मारीच और सुबाहु जैसी प्रवृति लोगों के बीच जीवित है ?