यहां बदल गई थी नर्मदा की धारा! जानिए क्यों कहा जाता है इसे ‘तांत्रिक यूनिवर्सिटी’?
मध्य प्रदेश के जबलपुर में स्थित चौसठ योगिनी मंदिर न सिर्फ एक प्राचीन धार्मिक स्थल है, बल्कि इसे भारत की 'तांत्रिक यूनिवर्सिटी' भी कहा जाता है। इस मंदिर में 64 योगिनियों की मूर्तियां स्थापित हैं, जो शक्ति उपासना और तंत्र साधना का प्रतीक हैं।

भारत एक ऐसा देश है, जहां हर मंदिर की अपनी अनूठी कहानी और पौराणिक महत्व है। लेकिन मध्य प्रदेश के जबलपुर में स्थित चौसठ योगिनी मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि इसे ‘तांत्रिक यूनिवर्सिटी’ भी कहा जाता है। यहां तंत्र-मंत्र की साधना होती थी, और यह स्थान शिव-पार्वती विवाह से भी जुड़ा हुआ है। महाशिवरात्रि के अवसर पर यह मंदिर विशेष महत्व रखता है, क्योंकि यहां भगवान शिव और माता पार्वती की एक अनोखी प्रतिमा स्थापित है, जो पूरे भारत में अपने आप में एकमात्र है।
कैसे पड़ा ‘चौसठ योगिनी मंदिर’ नाम?
यह मंदिर 9वीं शताब्दी का बताया जाता है और इसका निर्माण कलचुरी वंश के राजाओं ने करवाया था। यह मंदिर जबलपुर के भेड़ाघाट क्षेत्र में स्थित है, जो अपनी संगमरमर की चट्टानों और नर्मदा नदी के कारण पहले से ही एक प्रसिद्ध स्थान है। इस मंदिर का नाम ‘चौसठ योगिनी’ इसलिए पड़ा क्योंकि यहां 64 योगिनियों की प्रतिमाएं स्थापित हैं। ये सभी योगिनियां देवी दुर्गा के विभिन्न रूप मानी जाती हैं।
हालांकि, आज केवल 61 प्रतिमाएं ही शेष बची हैं, लेकिन इस मंदिर का धार्मिक और तांत्रिक महत्व आज भी बरकरार है। कहा जाता है कि इस स्थान पर शक्ति संप्रदाय से जुड़े साधकों को तंत्र-मंत्र की शिक्षा दी जाती थी। इसीलिए इसे ‘तांत्रिकों की यूनिवर्सिटी’ भी कहा जाता है।
क्या है तांत्रिक साधना का रहस्य?
चौसठ योगिनी मंदिर सिर्फ एक पूजा स्थल ही नहीं, बल्कि प्राचीन काल में इसे तंत्र-साधना के केंद्र के रूप में भी जाना जाता था। ऐसा माना जाता है कि यहां साधक कई तरह की सिद्धियों को प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या करते थे। यह मंदिर शक्ति (देवी दुर्गा) और शिव के मिलन का प्रतीक माना जाता है। तंत्र शास्त्र के अनुसार, चौसठ योगिनियां वे शक्तियां हैं, जो ब्रह्मांड के संतुलन को बनाए रखती हैं। जब कोई साधक इन योगिनियों की साधना करता है, तो उसे दिव्य ज्ञान और सिद्धियां प्राप्त हो सकती हैं।
इस मंदिर की सबसे खास बात यहां स्थित भगवान शिव और माता पार्वती की अद्वितीय प्रतिमा है, जिसमें दोनों नंदी (बैल) पर एक साथ विराजमान हैं। पूरे भारत में इस तरह की मूर्ति कहीं और देखने को नहीं मिलती। कहा जाता है कि यही वह स्थान था, जहां शिव और पार्वती का विवाह संपन्न हुआ था। इसीलिए महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां विशेष पूजा, अभिषेक और भजन-कीर्तन का आयोजन होता है। इस दिन हजारों श्रद्धालु इस मंदिर में दर्शन करने आते हैं।
नर्मदा नदी और चौसठ योगिनी मंदिर का संबंध
मंदिर की सबसे खास बात यह है कि यह एक ऊँची पहाड़ी पर स्थित है, जहां से नर्मदा नदी का मनमोहक दृश्य दिखाई देता है।एक पौराणिक कथा के अनुसार, जब भगवान शिव और माता पार्वती इस क्षेत्र में आए थे, तो वे एक पहाड़ी पर ठहर गए थे। यहां सुवर्ण ऋषि नामक एक संत तपस्या कर रहे थे। जब उन्होंने भगवान शिव को देखा, तो वे इतने प्रसन्न हुए कि उन्होंने शिव से निवेदन किया कि वे इस स्थान पर स्थायी रूप से विराजमान रहें। जब ऋषि सुवर्ण नर्मदा का पूजन करने के लिए गए, तो उनके मन में यह विचार आया कि यदि भगवान शिव हमेशा के लिए इस स्थान पर रुक जाएं, तो इस भूमि का कल्याण होगा। उन्होंने नर्मदा में समाधि ले ली, और भगवान शिव ने इस स्थान को अपना निवास बना लिया।
वही इस मंदिर की अनोखी वास्तुकला की बात करें तो यह मंदिर वास्तुकला का भी एक अद्भुत उदाहरण है। यह पूरी तरह बलुआ पत्थर और लाल पत्थरों से बना हुआ है, जो 1000 सालों से भी अधिक समय से मौसम की मार झेलकर भी मजबूती से खड़ा है। मंदिर तक पहुंचने के लिए 108 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं, जो आध्यात्मिक सफर का प्रतीक मानी जाती हैं। मंदिर के चारों ओर 64 योगिनियों की मूर्तियां एक वृत्ताकार मंडल में स्थापित हैं।
महाशिवरात्रि के दिन इस मंदिर में विशेष अनुष्ठान और रात्रि जागरण किया जाता है। इस दौरान भगवान शिव का दुग्धाभिषेक किया जाता है और हजारों श्रद्धालु शिव की आराधना करने के लिए यहां पहुंचते हैं। रातभर भजन-कीर्तन और शिव तांडव स्तोत्र के पाठ किए जाते हैं, जिससे यह स्थान पूरी तरह भक्तिमय माहौल में डूब जाता है। चौसठ योगिनी मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि शक्ति साधना, तांत्रिक विद्या और अद्भुत शिल्पकला का संगम है। महाशिवरात्रि पर इस मंदिर की रौनक देखते ही बनती है, जब हजारों श्रद्धालु यहां भगवान शिव और माता पार्वती के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। यदि आप कभी मध्य प्रदेश जाएं, तो इस ऐतिहासिक और रहस्यमयी मंदिर के दर्शन करना न भूलें!
चौसठ योगिनी मंदिर भारत के सबसे अनोखे मंदिरों में से एक है, जो शक्ति, तंत्र और भगवान शिव-पार्वती के विवाह का साक्षी है। यहां की अद्भुत वास्तुकला, रहस्यमयी तंत्र-साधना, और नर्मदा नदी का दिव्य सौंदर्य इसे एक विशेष धार्मिक स्थल बनाता है। महाशिवरात्रि के अवसर पर यह मंदिर विशेष रूप से चमक उठता है, जब हजारों श्रद्धालु इस स्थान पर पूजा-अर्चना के लिए आते हैं। अगर आपको भारतीय संस्कृति, धर्म और इतिहास में रुचि है, तो आपको एक बार ‘भारत की तांत्रिक यूनिवर्सिटी’ कहे जाने वाले इस मंदिर के दर्शन जरूर करने चाहिए!
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