MONDAY 07 APRIL 2025
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क्या America ने तोड़ी है “Jagannath Mandir” की सैकड़ों वर्ष पुरानी परंपरा , जानिए क्या है पूरा सच

सवाल उठा रहे हैं, जब मंदिर में ग़ैर हिंदू की एंट्री वर्जित है, तो फिर अमेरिकी राजदूत ने प्रभु जगन्नाथ के दर्शन कैसे किये ? …. इन तस्वीरों का सच क्या है? देखिये इस पर हमारी ये ख़ास रिपोर्ट

क्या America ने तोड़ी है “Jagannath Mandir” की सैकड़ों वर्ष पुरानी परंपरा , जानिए क्या है पूरा सच

भारत से सात समंदर पार अमेरिका एक ऐसा ताकतवर मुल्क है, जहां जाने की ख्वाहिश हर किसी के मन में होती ही है क्योंकि विकसित देशों में अमेरिका टॉप पर है। आप मानें, या नहीं लेकिन सच तो यहीं है कि आज भी अमेरिका अपने आप में विश्व शक्ति है। अमेरिकी सेना की पावर किसी से छिपी नहीं है, 14 लाख अमेरिकी सैनिकों के पास 8848 टैंक हैं। 15893 एयरक्राफ़्ट हैं और 72 सबमरीन हैं। अमेरिका आज भी विकासशील देशों की डोर अपने हाथों में रखता है लेकिन क्या आप जानते हैं  33 करोड़ अमेरिकी आबादी ख़ुद को भारत की आध्यात्मिक दुनिया से जोड़ने की कोशिश कर रही है। अमेरिकी घरों पर भगवा पताका लहरा रही है। दीपों का महोत्सव दीवाली हो या फिर रंगों का उत्सव होली हिंदुओं के इन त्यौहारों में अमेरिकी बढ़चढ़ कर हिस्सा लेते हैं। बक़ायदा भारत आकर यहाँ की तीर्थों की परिक्रमा करते हैं। इसी कड़ी में एक नाम अमेरिकी राजदूत एरिक गार्सेटी है, जो पिछले दिनों प्रभु जगन्नाथ के दर्शनों के लिए जगन्नाथपुरी धाम पहुँचेऔर यहाँ से अब उनकी जो तस्वीरें वायरल हो रही है, उसे लेकर कुछ लोग अमेरिका पर जगन्नाथ मंदिर की परंपरा को तोड़ने का आरोप लगा रहे हैं? सवाल उठा रहे हैं, जब मंदिर में ग़ैर हिंदू की एंट्री वर्जित है, तो फिर अमेरिकी राजदूत ने प्रभु जगन्नाथ के दर्शन कैसे किये ? इन तस्वीरों का सच क्या है? देखिये इस पर हमारी ये ख़ास रिपोर्ट

नाथों के नाथ प्रभु जगन्नाथ के दिव्य धाम के बाहर एक तख्ती लगी हुई है, जिसमें साफ शब्दों में लिखा है। मंदिर में गैर हिंदुओं का प्रवेश वर्जित है..इसी कारण देश का प्रधानमंत्री हो या फिर राष्ट्रपति अगर वो गैर हिंदू हैं, तो उन्हें मंदिर की गर्भगृह तक जाने नहीं दिया जाएगा। इसी के चलते संत कबीर से लेकर बीआर अंबेडकर, वायसराय लॉर्ड कर्जन, थाईलैंड की पूर्व रानी महाचक्री सिरिधरन और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी , कोई भी हस्ति गर्भगृह की चौखट को पार नहीं कर पाई लेकिन जब मंदिर की चौखट तक एक अमेरिकी पहुँचा, तो वायरल तस्वीरों को लेकर बवाल हो गया। दरअसल पिछले महीने 28 सितंबर 2024 को अमेरिकी राजदूत एरिक गार्सेटी जगन्नाथ धाम पहुँचे। यहाँ उन्होंने पतितपावन के दर्शन किये। यानी की मंदिर शिखर के ध्वज परिवर्तन रिती -रिवाज का हिस्सा बने और अपने इसी अनुभव को उन्होंने सोशल मीडिया पर साझा किया और कहा "Visited the incredible Jagannath Temple in Puri—a nearly 1000-year-old marvel by the Bay of Bengal. Watching priests climb the 65-meter tower for the nightly flag change was truly breathtaking. The streets of Puri with artists preparing for Durga Puja, captures the vibrant spirit of incredible India. This country never fails to amaze me with its rich cultural heritage"

गार्सेटी का ये पोस्ट ये दर्शाता है कि उनके लिए पतितपावन के दर्शन करने अभूतपूर्व रहा उन्होंने ये माना कि भारत की संस्कृति हमेशा से उन्हें आश्चर्य चकित करती आई है लेकिन इन तस्वीरों पर कुछ लोगों के कमेंट ने कई सवाल उठा दिये हैं। गार्सेटी से ये पूछा जाने लगा कि क्या वो मंदिर की गर्भगृह में भी गये? जनता पार्टी की तरफ़ से ट्वीट किया गया। इस मंदिर का शुद्धीकरण अब ज़रूरी है गंगाजल दूध से पवित्र करना चाहिए विधर्मियों को मंदिर में जाने का हक़ किसने दिया और क्यों ? हमारी आस्था और परम्परा को तोड़ा जा रहा है जो अनुचित है।

जिन लोगों को ये लगा कि गार्सेटी मंदिर की गर्भगृह तक गये, जिसके चलते उन्होंने मंदिर की परंपरा को तोड़ा होगा। जबकी हक़ीक़त में ऐसा कुछ नहीं है, वायरल तस्वीरों की हक़ीक़त हम आपको बता दें। अमेरिका राजदूत गार्सेटी ने बाहरी तौर से मंदिर के दर्शन किये और अपनी आँखों से ध्वज परिवर्तन प्रक्रिया देखी..जो उनके लिए प्रभु जगन्नाथ के दर्शन समान है, यानी की जगन्नाथपुरी में ना ही कोई परंपरा तोड़ी गई और ना ही हिंदुओं की आस्था से कोई खिलवाड़ किया गया। 

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