मंडी की ‘छोटी काशी’ में गूंजे हर-हर महादेव के जयकारे, पहली बार हुई ब्यास आरती
हिमाचल प्रदेश के मंडी शहर, जिसे 'छोटी काशी' के नाम से भी जाना जाता है, ने महाशिवरात्रि 2025 के मौके पर एक नया इतिहास रच दिया। पहली बार ब्यास नदी के तट पर काशी की गंगा आरती की तर्ज पर भव्य ब्यास आरती का आयोजन किया गया। इस दिव्य आयोजन में काशी से आए पांच विद्वान पंडितों ने भाग लिया और विधिवत मंत्रोच्चारण के साथ आरती संपन्न की।

हिमाचल प्रदेश के मंडी शहर, जिसे 'छोटी काशी' के नाम से भी जाना जाता है, वहां इस वर्ष महाशिवरात्रि महोत्सव के अवसर पर एक ऐतिहासिक पहल हुई। भगवान शिव की नगरी काशी की तर्ज पर, मंडी में पहली बार ब्यास नदी के तट पर भव्य ब्यास आरती का आयोजन किया गया, जिसने पूरे वातावरण को आध्यात्मिकता और भक्ति के रंगों से सराबोर कर दिया।
काशी से मंडी तक की आध्यात्मिक यात्रा
महाशिवरात्रि की संध्या पर, विश्व प्रसिद्ध पंचवक्त्र मंदिर के सामने स्थित पौराणिक विपाशा (ब्यास) नदी के तट पर यह दिव्य आरती संपन्न हुई। इस आयोजन की विशेषता यह रही कि काशी से पांच विद्वान पंडित विशेष रूप से आमंत्रित किए गए थे, जिन्होंने गंगा आरती की तर्ज पर ब्यास आरती का संचालन किया। दिलचस्प बात यह है कि ये पंडित मूल रूप से हिमाचल प्रदेश के ही निवासी हैं, जो वर्तमान में काशी में गंगा महाआरती में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
ब्यास और सुकेती नदियों के संगम पर पांच विशेष मंचों की स्थापना की गई, जहां से आरती का संचालन हुआ। मंडी शहर की विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और स्वयंसेवी संस्थाओं ने इस आयोजन में सक्रिय भागीदारी निभाई। शहरवासियों ने अपने घरों से एक-एक दीया लाकर महाशिवरात्रि की इस पावन संध्या को रोशनी से जगमगा दिया, जिससे पूरा वातावरण दिव्यता से भर गया।
प्रशासन और स्थानीय समुदाय का योगदान
उपायुक्त मंडी, अपूर्व देवगन ने मीडिया से बातचीत में बताया कि इस वर्ष महाशिवरात्रि महोत्सव के दौरान पहली बार ब्यास आरती का आयोजन किया गया है। उन्होंने कहा, "महाशिवरात्रि धार्मिक उत्सव होने के नाते, प्रशासन और मंडी के लोगों ने ब्यास आरती के आयोजन को लेकर एक नई पहल की है। भगवान शिव को ब्यास आरती के माध्यम से याद कर, मंडी के लोगों ने महाशिवरात्रि महोत्सव का शुभारंभ किया है।" उन्होंने यह भी बताया कि इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में विभिन्न विभागों और स्थानीय संस्थाओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
मंडी जिले के धर्मपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक, चंद्रशेखर ने इस अवसर पर कहा, "भगवान शंकर की जटाओं से निकलकर मोक्षदायिनी गंगा की धारा मंडी में ब्यास के रूप में बह रही है। इसके सम्मान में आज भव्य ब्यास आरती का आयोजन हुआ है।" उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इस प्रकार का आयोजन स्थानीय लोगों की भागीदारी के बिना संभव नहीं था, और स्थानीय संस्थाओं ने अपना पूरा सहयोग प्रशासन को प्रदान किया।
काशी से ब्यास आरती के लिए मंडी आए मुख्य पंडित, युगल शर्मा ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा, "महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर, मंडी प्रशासन ने काशी में होने वाली गंगा आरती की तरह ब्यास आरती करवाने का संकल्प लिया था। इसी संकल्प को पूरा करने के लिए हम सभी पंडितों ने काशी की गंगा महाआरती की तरह मंडी में ब्यास आरती का आयोजन किया।" उन्होंने यह भी बताया कि वह मूल रूप से हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले के शोघी क्षेत्र के निवासी हैं, और अपने प्रदेश में ब्यास आरती करवाना उनके लिए एक विशेष अनुभव रहा।
इस सफल आयोजन के बाद, उम्मीद है कि ब्यास आरती मंडी के धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का नियमित हिस्सा बनेगी। यह न केवल स्थानीय समुदाय को आध्यात्मिकता से जोड़ने का माध्यम बनेगा, बल्कि पर्यटन को भी बढ़ावा देगा, जिससे मंडी की पहचान राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत होगी।
मंडी में ब्यास आरती का यह प्रथम आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह सांस्कृतिक एकता और समुदाय की सहभागिता का प्रतीक भी है। भगवान शिव की कृपा से, यह आयोजन आने वाले वर्षों में और भी भव्य और व्यापक रूप में आयोजित होगा, जिससे मंडी की 'छोटी काशी' के रूप में पहचान और भी सुदृढ़ होगी।
Source-आईएएनएस
Advertisement